
*महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में 300 कन्याओं का सामूहिक विवाह: पांढुर्णा-छिंदवाड़ा की बेटियों का भी हुआ विवाह*
रिपोर्टर धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
*जाम सांवली के 200 शिष्यों ने संभाली पंडाल व्यवस्था*
पांढुरना – महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सिद्ध पीठ श्री बागेश्वर धाम (छतरपुर) में आयोजित ‘महाशिवरात्रि बागेश्वर धाम महाकुंभ महोत्सव’ इस वर्ष भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। इस भव्य आयोजन में जहां 300 कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ, वहीं छिंदवाड़ा और नवगठित जिला पांढुर्णा के श्रद्धालुओं व सेवादारों की सहभागिता ने आयोजन को और अधिक गौरवपूर्ण बना दिया।

*300 बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह, पांढुरना-छिंदवाड़ा की बेटियों को मिला नया जीवन*
पूज्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के पावन सानिध्य में 300 कन्याओं का विशाल सामूहिक विवाह पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार एवं हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पावन अवसर पर पांढुरना, छिंदवाड़ा अंचल की दो निर्धन बेटियों का विवाह भी धाम द्वारा संपन्न कराया गया, जिससे उनके परिवारों के चेहरे पर सम्मान और आत्मविश्वास की चमक दिखाई दी।
यह आयोजन केवल विवाह नहीं, बल्कि उन बेटियों के जीवन में आशा की नई रोशनी था, जिनके लिए विवाह का सपना आर्थिक परिस्थितियों के कारण कठिन बन जाता है।

*सेवा का संकल्प: जाम सांवली धाम के 200 शिष्यों ने संभाली व्यवस्थाएं*
इस ऐतिहासिक आयोजन में श्री बागेश्वर धाम वनवासी शिष्य मंडल, जाम सांवली धाम की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। मंडल के लगभग 200 समर्पित शिष्यों ने विवाह पंडाल की व्यवस्थाएं संभालते हुए सेवा कार्य को पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाया।
सेवादारों ने विवाह स्थल पर वर-वधुओं एवं उनके परिजनों की सुविधा, भोजन, बैठने की व्यवस्था, मार्गदर्शन तथा पंडाल संचालन जैसे अनेक कार्यों को जिम्मेदारी से पूरा किया।
*बागेश्वर धाम समिति ने की सराहना*
बागेश्वर धाम समिति द्वारा जाम सांवली धाम से आए इन सेवा कार्यकर्ताओं के अनुशासन, समर्पण और सेवा भावना की विशेष रूप से प्रशंसा की गई। आयोजन में सेवा करने वाले शिष्यों ने इसे अपना “गिलहरी योगदान” बताते हुए भविष्य में भी ऐसे सामाजिक व धार्मिक कार्यों में निरंतर सहभागी बनने का संकल्प लिया।
*सामाजिक समरसता का संदेश:* *“बेटी की विदाई अब विवशता नहीं”*
पूज्य गुरुदेव का संकल्प —
“बेटी की विदाई, अब नहीं होगी विवशता”
इस आयोजन की आत्मा बनकर उभरा। यह महोत्सव सिर्फ धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में मानवता, सेवा और समरसता का मजबूत संदेश देता नजर आया।
*प्रतिनिधि का वक्तव्य*
इस अवसर पर श्री बागेश्वर धाम वनवासी शिष्य मंडल के प्रतिनिधि नरोत्तम भाई पटेल ने कहा—
“यह हमारे क्षेत्र के लिए सौभाग्य की बात है कि जाम सांवली धाम के शिष्य इस पुनीत कार्य में सहभागी बन रहे हैं। बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराना ही सबसे बड़ी सेवा है।”
महाशिवरात्रि पर आयोजित यह सामूहिक विवाह महोत्सव भक्ति के साथ-साथ सेवा और संवेदना का प्रतीक बन गया। पांढुर्णा-छिंदवाड़ा के शिष्यों की निस्वार्थ सेवा और बेटियों के सम्मानपूर्वक विवाह ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह आयोजन आने वाले समय में भी मानवता और सामाजिक उत्थान के लिए प्रेरणा देता रहेगा।